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Wednesday, June 4, 2014

वमन (उल्टी) Home remedies for vomiting

वमन (उल्टी) Home remedies for vomiting 
 
वमन या उल्टी कोई बड़ा रोग नहीं है बल्कि पेट की खराबी का ही एक रूप है । जब कभी कोई अनावश्यक पदार्थ पेट में अधिक एकत्रित हो जाता है तो उसे निकालने के लिए पेट प्रतिक्रिया करता है जिससे पेट में एकत्रित पदार्थ उल्टी द्वारा बाहर निकल जाता है | कभी - कभी अधिक उल्टी होने से रोगी के शरीर में पानी की कमी होने के साथ-साथ कमजोरी भी आ जाती है |
आइये जानते हैं विभिन्न औषधियों द्वारा रोग का उपचार -

१- पुदीने और नींबू का रस बराबर मात्रा में मिला लें | यह एक चम्मच की मात्रा में ३-४ बार रोगी को पिलाने से उल्टी का बार- बार आना बंद हो जाता है |

२- १०-१० मिली पुदीना,प्याज़ और नींबू का रस मिलाकर थोड़ी-थोड़ी मात्रा में रोगी को पिलाने से हैजे में होने वाली उलटी में बहुत लाभ होता है |

३- तुलसी के पत्तों का रस पीने से उल्टी भी बंद हो जाती है और पेट के कीड़े भी मर जाते हैं| शहद और तुलसी का रस मिलाकर चाटने से जी मिचलाना और उल्टी ठीक होती है|

४- अगर उल्टी बंद न हो रही हो तो दो लौंग और थोड़ी सी दालचीनी लेकर एक कप पानी में डालकर उबाल लें और जब पानी आधा रह जाए तब छानकर रोगी को पिलायें| इससे उल्टी का बार-बार आना बंद हो जाता है|

५- उल्टी होने पर सूखा या हरा धनिया कूटकर पानी में डालकर फिर निचोड़कर ५ चम्मच रस निकाल लें | यह रस बार-बार रोगी को पिलाने से उलटी आनी बंद हो जाती है |

६- नींबू को काटकर इसमें चीनी और काली मिर्च भरकर चूंसने से उल्टी और जी मिचलाना बंद हो जाता है |

७- पका हुआ केला खाने से खून की उल्टी बंद हो जाती है |

८- २० ग्राम सौंफ और दस पुदीने के पत्तों को एक लीटर पानी में उबालकर छान लें और ठंडा करके थोड़ी-थोड़ी देर में रोगी को पिलायें | इससे उल्टी में बहुत आराम होता है |

Tuesday, June 3, 2014

उदर-वायु [पेट में गैस बनना], Ayurvedic remedies for Gas trouble

Ayurvedic remedies for Gas trouble in Hindi

उदर-वायु [पेट में गैस बनना]

वैद्य नवीन चौहान, आयुर्वेद फिजीशियन 

उदर-वायु एक आम तथा कभी न कभी हर किसी को होने वाली समस्या है। आयुर्वेद में  पेट गैस को अपांनवायु या  अधोवायु बोलते हैं। इसका मूल कारण जठराग्नि का असंतुलन होना  है।  पेट में वायु की विकृति से कई बीमारियां हो सकती हैं, जैसे एसिडिटी, कब्ज, पेटदर्द, सिरदर्द, जी मिचलाना, बेचैनी आदि। :

सामान्य कारण

पेट में गैस बनने के कई कारण हो सकते हैं जैसे:


  • बैक्टीरिया का पेट में ओवरप्रोडक्शन होना 
  • मिर्च-मसाला, तली-भुनी चीजें, जंक फूड  ज्यादा खाने से
  • पाचन संबधी विकार (कमजोर जठराग्नि)
  • विरुद्ध आहार का सेवन : बींस, राजमा, छोले, लोबिया, मोठ, उड़द की दाल, फास्ट फूड, ब्रेड और किसी-किसी को दूध या भूख से ज्यादा खाने से। खाने के साथ कोल्ड ड्रिंक लेने से क्योंकि इसमें गैसीय तत्व होते हैं। इसके साथ बासी खाना खाने से और खराब पानी पीने से भी गैस हो जाती है।
  • समय पर भोजन न करना 


आयुर्वेद उपचार व बचाव 

आयुर्वेद में जठराग्नि को प्रधान अग्नि माना गया है। अतः उन कारणो का त्याग करें जिनसे जठराग्नि में विकृति आती है। सही समय पर, सही भोज्य पदार्थों को ही ग्रहण करें । 
काला नमक, जीरा, सोंठ, काली मिर्च, पिप्पली, अजवायन आदि औषधियाँ अग्नि को ठीक करने में सहायक हैं। इसके अतिरिक्त वैद्य की सलाह से हिंगवासटक चूर्ण, अभयारिस्ट, शंख भस्म, महाशंख वटी आदि औषधियों का प्रयोग भी गैस की समस्या में किया जा सकता है। 

घरेलू उपचार


* भोजन के साथ सलाद के रूप में टमाटर का प्रतिदिन सेवन करना लाभप्रद होता है। यदि उस पर काला नमक डालकर खाया जाए तो लाभ अधिक मिलता है। पथरी के रोगी को कच्चे टमाटर का सेवन नहीं करना चाहिए।
* 1/2 चम्मच सूखा अदरक पाउडर [सौंठ] लें और उसमें एक चुटी हींग और सेंधा नमक मिला कर एक कप गरम पानी में डाल कर पीएं।
* गैस के कारण सिर दर्द होने पर चाय में पिसी कालीमिर्च डालें। वही चाय पीने से लाभ मिलता है।
* कुछ ताजा अदरक स्लाइस की हुई नींबू के रस में भिगो कर भोजन के बाद चूसने से राहत मिलेगी।
* पेट में या आंतों में ऐंठन होने पर एक छोटा चम्मच अजवाइन में थोड़ा नमक मिलाकर गर्म पानी में लेने पर लाभ मिलता है। बच्चों को अजवायन थोड़ी दें।
*भोजन के एक घंटे बाद 1 चम्मच काली मिर्च, 1 चम्मच सूखी अदरक और 1 चम्मच इलायची के दानो को 1/2 चम्मच पानी के साथ मिला कर पिएं।
* वायु समस्या होने पर हरड़ के चूर्ण को शहद के साथ मिक्स कर खाना चाहिए।
* अजवायन, जीरा, छोटी हरड़ और काला नमक बराबर मात्रा में पीस लें। बड़ों के लिए दो से छह ग्राम, खाने के तुरंत बाद पानी से लें। बच्चों के लिए मात्रा कम कर दें।
* अदरक के छोटे टुकड़े कर उस पर नमक छिड़क कर दिन में कई बार उसका सेवन करें। गैस परेशानी से छुटकारा मिलेगा, शरीर हलका होगा और भूख खुलकर लगेगी।

योग

वज्रासन : खाने के बाद घुटने मोड़कर बैठ जाएं। दोनों हाथों को घुटनों पर रख लें। 5 से 15 मिनट तक करें।
गैस पाचन शक्ति कमजोर होने से होती है। यदि पाचन शक्ति बढ़ा दें तो गैस नहीं बनेगी। योग की अग्निसार क्रिया से आंतों की ताकत बढ़कर पाचन सुधरेगा।

Monday, June 2, 2014

मोटापा [Obesity] से छुटकारा पाने के कुछ सरल उपाय

मोटापा [Obesity]
मोटापा एक बीमारी है जो अनेक कारणों से होती है यथा व्यायाम न करना , हर समय आराम करना , अधिक मात्रा में चिकने व मीठे पदार्थों का सेवन आदि | कुछ लोगों में मोटापा वंशानुगत भी होता है | मोटापे के कारण रक्तचाप बढ़ जाता है और वायु संचरण में रुकावट महसूस होती है| मोटापे के कारण त्वचा फूल जाती है जिससे शरीर पूर्ण रूप से वायु ग्रहण नहीं कर पाता | अधिक चर्बी के कारण हृदय पर भी प्रभाव पढता है जिससे हृदय की गति धीमी हो जाती है|
मोटापे से छुटकारा पाने के लिये जीवनशैली में परिवर्तन की आवश्यकता होती है | आईये जानते हैं इससे छुटकारा पाने के कुछ सरल उपाय -

१- मोटापे से पीड़ित व्यक्ति को प्रातःकाल उठकर टहलना चाहिए तथा आसान व प्राणायाम का अभ्यास नियमित रूप से करना चाहये | ऐसा करने से वजन बहुत तेज़ी से घटता है |
२- २५ मिलीलीटर में नींबू के रस में २५ ग्राम शहद मिलाकर १०० मिलीलीटर गुनगुने पानी के साथ प्रतिदिन सुबह-शाम पीने से मोटापा दूर होता है |
३- सूखा धनिया,मिश्री और मोटी सौंफ को बराबर मात्रा में लेकर चूर्ण बना लें | इस चूर्ण को एक चम्मच सुबह पानी के साथ लेने से अधिक चर्बी कम होकर मोटापा दूर होता है | मधुमेह के रोगी यह प्रयोग न करें |
४- तुलसी के पत्तों का रस १० बूँद और शहद २ चम्मच को एक गिलास पानी में मिलाकर प्रतिदिन पीने से मोटापा कम होता है |
५- टमाटर और प्याज में थोड़ा सा सेंधा नमक और थोड़ी सी पीसी हुई काली मिर्च डालकर भोजन से पहले सलाद के रूप में खाने से भूख कम लगती है और मोटापा कम होता है |
६- रात को सोने से पहले १५ ग्राम त्रिफला चूर्ण को हल्के गर्म पानी में भिगोकर रख दें और सुबह इस पानी को छानकर एक चम्मच शहद मिलकर पी लें | इससे मोटापा जल्दी दूर होता है |

मधुमेह [डायबिटीज ]

मधुमेह [डायबिटीज ]------- 

- आजकल टीवी में तरह तरह के विज्ञापन आते रहते है की इन दवाइयों का उपयोग करने से आप मधुमेह से छुटकारा पा सकेंगे. इसमें कई आयुर्वेदिक है कई एलोपेथी के .
- मधुमेह से परेशान व्यक्ति सब तरह की दवाइयां आजमाता है पर मधुमेह से छुटकारा नहीं पा पाता क्योंकि यह एक बहुत बड़ा मिथक है की मधुमेह एक रोग है.
- मधुमेह एक स्थिति है जिसमे शरीर के एक महत्वपूर्ण अंग ने बगावत कर दी है . आसपास बहुत शकर है , ऊर्जा है पर शरीर उसे इस्तेमाल नहीं कर पाता.
- वह क्या कारण है जो हमारे शरीर का ही एक अंग हमारा साथ नहीं देता . वह है हमारी आत्मा जो हमारे विचार निरंतर झेलती है. कुछ नकारात्मक विचार जो हम लगातार करते रहते है हमारे किसी ना किसी नाज़ुक ग्रंथी को या तो सुस्त या अधिक कार्यरत कर देते है.
- जीवनी शक्ति उन अंगों तक पहुँच नहीं पाती. इस लिए ध्यान अत्यावश्यक है. मधुमेह के मरीज़ रोज़ भोजन से पहले शांत चित्त हो कर विचार करे की प्रभु की दिव्य शक्ति लीवर को प्राप्त हो रही है जिससे हमारे रक्त में जो शर्करा है वह कम हो रही है.
- ध्यान करते हुए हमें स्वयं को परेशान करने वाले विचारों को फेंक देना है. जो पुराने और भुला दिए गए नकारात्मक विचार है उन्हें भी हटाना है.
- ये नकारात्मक विचार किसी के लिए गुस्सा , नफरत , किसी का दिया आघात , कोई कमी का अनुभव आदि हो सकते है.
- कभी बिना भूख के खाना और कभी भूख लगने पर भी ना खाना दोनों ही गलत है.
- कई दिनों के उपवास जिसमे चाय कॉफ़ी पी जाए , साबूदाना , वनस्पति घी , रबड़ी , पेड़े , सफ़ेद शकर , तले हुए कंद आदि लिए जाए गलत है.
- उपवास जिसमे एसिडिटी हो गलत है.
- पॉलिश वाले चावल , सफ़ेद शकर, मैदा, आदि पदार्थों का अधिक सेवन कभी ना करे.
- भोजन प्रेशर कूक ना करे. हो सके तो मिटटी के बर्तन में उबला अन्न ले. एल्युमिनियम में तो बिलकुल ना पकाए.
- वात प्रवृत्ति पर नियंत्रण पाने के लिए अनुलोम विलोम और कपालभाती प्राणायाम अत्यावश्यक है. मंडूकासन करने से भी लाभ होता है |
- पेट और कमर के आसपास कभी चर्बी जमा ना होने दे. यह मधुमेह को जन्म देती है.
- सभी प्रकार के रस वाले और हर प्रकार से खाए जाने वाले अन्न ले.
- ज़मीन पर बैठ कर हाथों से भोजन ले. भोजन के पहले प्रार्थना अवश्य करे.
- गौसेवा करे और पंचगव्य का सेवन करे.

Sunday, May 25, 2014

हरड़ Helath benefits of Harad

हरड़ -
हरड़ के नाम से तो हम सब बचपन से ही परिचित हैं | इसके पेड़ पूरे भारत में पाये जाते हैं | इसका रंग काला व पीला होता है तथा इसका स्वाद खट्टा,मीठा और कसैला होता है | आयुर्वेदिक मतानुसार हरड़ में पाँचों रस -मधुर ,तीखा ,कड़ुवा,कसैला और अम्ल पाये जाते हैं | वैज्ञानिक मतानुसार हरड़ की रासायनिक संरचना का विश्लेषण करने पर ज्ञात होता है कि इसके फल में चेब्यूलिनिक एसिड ३०%,टैनिन एसिड ३०-४५%,गैलिक एसिड,ग्लाइकोसाइड्स,राल और रंजक पदार्थ पाये जाते हैं | ग्लाइकोसाइड्स कब्ज़ दूर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं| ये तत्व शरीर के सभी अंगों से अनावश्यक पदार्थों को निकालकर प्राकृतिक दशा में नियमित करते हैं | यह अति उपयोगी है | आज हम हरड़ के कुछ लाभ जानेंगे -
१- हरड़ के टुकड़ों को चबाकर खाने से भूख बढ़ती है |
२- छोटी हरड़ को पानी में घिसकर छालों पर प्रतिदिन ०३ बार लगाने से मुहं के छाले नष्ट हो जाते हैं | इसको आप रात को भोजन के बाद भी चूंस सकते हैं |
३- छोटी हरड़ को पानी में भिगो दें | रात को खाना खाने के बाद चबा चबा कर खाने से पेट साफ़ हो जाता है और गैस कम हो जाती है |
४- कच्चे हरड़ के फलों को पीसकर चटनी बना लें | एक -एक चम्मच की मात्रा में तीन बार इस चटनी के सेवन से पतले दस्त बंद हो जाते हैं |
५- हरड़ का चूर्ण एक चम्मच की मात्रा में दो किशमिश के साथ लेने से अम्लपित्त (एसिडिटी ) ठीक हो जाती है |
६- हरीतकी चूर्ण सुबह शाम काले नमक के साथ खाने से कफ ख़त्म हो जाता है |
७- हरड़ को पीसकर उसमे शहद मिलाकर चाटने से उल्टी आनी बंद हो जाती है|

Thursday, April 3, 2014

नारियल के लाभ

नारियल को श्रीफल भी कहा जाता है। ऐसा इसकी धार्मिक महत्ता के साथ-साथ औषधीय गुणों के कारण कहा जाता है। नारियल में विटामिन, पोटैशियम, फाइबर, कैल्शियम, मैग्नीशियम, विटामिन और खनिज तत्व प्रचुर मात्रा में पाये जाते हैं। नारियल कई बीमारियों के इलाज में काम आता है। नारियल में वसा और कोलेस्ट्रॉल नही होता है, इसलिए नारियल मोटापे से भी निजात दिलाने में मदद करता है। आइए जानते हैं नारियल के चमत्कारी गुणों के बारे में।

नारियल के लाभ –
नकसीर के लिए –नकसीर की समस्या कई लोगों को हो सकती है। नाक से खून निकलने पर कच्चे नारियल का पानी का सेवन नियमित रूप से करना फायदेमंद होता है। अगर खाली पेट नारियल का सेवन किया जाए तो खून का बहाव बंद हो जाता है।

दिमाग के लिए – नारियल खाने से याद्दाश्त बढती है। नारियल की गरी में बादाम, अखरोट एवं मिश्री मिलाकर हर रोज खाने से स्मृति में बढती है। बच्चों को नारियल खिलाना चाहिए, इससे बच्चों का दिमागी विकास होता है।

मुहांसे के लिए – मुहांसों से निजात दिलाने में भी नारियल बहुत फायदेमंद होता है। नारियल के पानी में खीरे का रस मिलाकर सुबह-शाम नियमित रूप से लगाने से चेहरे के दाग-धब्बे मिटते हैं और चेहरा सुंदर एवं चमकदार होता है। नारियल के तेल में नींबू का रस अथवा ग्लिसरीन मिलाकर चेहरे पर लेप करने से भी मुहांसे समाप्त होते हैं।

वजन घटाने के लिए - मोटापा कम करने में नारियल बहुत फायदेमंद है। नारियल में कोलेस्ट्रॉल और वसा नहीं होता है। इसलिए नारियल का सेवन करके वजन को घटाया जा सकता है। मोटे लोगों को नारियल का सेवन करना चाहिए।

अच्छी नींद के लिए – अगर नींद न आने की समस्या है तो नारियल का सेवन कीजिए। नियमित रूप से रात के खाने के बाद आधा गिलास नारियल का पानी पीना चाहिए। इससे नींद न आने की समस्या खतम होती है और नींद अच्छी आती है।

सिरदर्द के लिए - नारियल तेल में बादाम को मिलाकर तथा बारीक पीसकर सिर पर लेप लगाना चाहिए। इससे सिरदर्द में तुरंत आराम होता है।

रूसी के लिए – बालों में रूसी की समस्या के लिए नारियल का तेल बहुत फायदेमंद है। नारियल के तेल में नींबू का रस मिलाकर बालों में लगाने से रूसी एवं खुश्की से छुटकारा मिलता है।

पेट के लिए - पेट में कीड़े होने पर सुबह नाश्ते के समय एक चम्मच पिसा हुआ नारियल का सेवन करने से पेट के कीडे बहुत जल्दी मर जाते हैं।

नारियल शरीर के लिए बहुत फायदेमंद होता है। नारियल को कई प्रकार से प्रयोग किया जाता है। नारियल त्वचा के लिए भी बहुत फायदेमंद होता है। इसलिए नारियल का प्रयोग किसी न किसी रूप में जरूर करना चाहिए।

Tuesday, February 18, 2014

Medicinal use of Shunthi (Sonth) महौषधि सौंठ


महौषधि सौंठ - 


सौंठ में अदरक के सारे गुण मौजूद होते हैं। सौंठ दुनिया की सर्वश्रेष्ठवातनाशक औषधि है. आम का रस पेट में गैस न करें इसलिए उसमें सौंठ और घी डाला जाता है। सौंठ में उदरवातहर (वायुनाशक) गुण होने से यह विरेचन औषधियों के साथ मिलाई जाती है। यह शरीर में समत्व स्थापित कर जीवनी शक्ति और रोग प्रतिरोधक सामर्थ्य को बढ़ाती है ।
बहुधा सौंठ तैयार करने से पूर्व अदरख को छीलकर सुखा लिया जाता है । परंतु उस छीलन में सर्वाधिक उपयोगी तेल (इसेन्शयल ऑइल) होता है, छिली सौंठ इसी कारण औषधीय गुणवत्ता की दृष्टि से घटिया मानी जाती है । वेल्थ ऑफ इण्डिया ग्रंथ के विद्वान् लेखक गणों का अभिमत है कि अदरक को स्वाभाविक रूप में सुखाकर ही सौंठ की तरह प्रयुक्त करना चाहिए । तेज धूप में सुखाई गई अदरक उस सौंठ से अधिक गुणकारी है जो बंद स्थान में कृत्रिम गर्मी से सुखाकर तैयार की जाती है । 
गर्म प्रकृति वाले लोगो के लिए सौंठ अनुकूल नहीं है.

- भोजन से पहले अदरक को चिप्स की तरह बारीक कतर लें। इन चिप्स पर पिसा काला नमक बुरक कर खूब चबा-चबाकर खा लें फिर भोजन करें। इससे अपच दूर होती है, पेट हलका रहता है और भूख खुलती है।

- सौंठ और उड़द उबालकर इसका पानी पीने से लकवा ठीक हो जाता है |

- सौंठ मिलाकर उबाला हुआ पानी पीने से पुराना जुकाम खत्म होता है। सौंठ के टुकड़े को रोजाना बदलते रहना चाहिए। 

- सोंठ, पीपल और कालीमिर्च को बराबर की मात्रा में लेकर पीस लें। इसमें 1 चुटकी त्रिकुटा को शहद के साथ चाटने से जुकाम में आराम आता है। 

- सौंठ, सज्जीखार और हींग का चूर्ण गर्म पानी के साथ सेवन करने से सारे तरह के दर्द नष्ट हो जाते हैं। 

- सौंठ और जायफल को पीसकर पानी में अच्छी तरह मिलाकर छोटे बच्चों को पिलाने से दस्त में आराम मिलता है। 

- सौंठ, जीरा और सेंधानमक का चूर्ण ताजा दही के मट्ठे में मिलाकर भोजन के बाद सेवन करने से पुराने अतिसार (दस्त) का मल बंधता है। आम (कच्ची ऑव) कम होता है और भोजन का पाचन होता है। 

- सौंठ को पानी या दूध में घिसकर नाक से सूंघने से और लेप करने से आधे सिर के दर्द में लाभ होता है। 

- लगभग 12 ग्राम की मात्रा में सौंठ को गुड़ के साथ मिलाकर खाने से शरीर की सूजन खत्म हो जाती है। 

- सोंठ, कालीमिर्च और हल्दी का अलग-अलग चूर्ण बना लें। प्रत्येक का 4-4 चम्मच चूर्ण लेकर मिला लें और इसे कार्क की शीशी में भरकर रख लें। इसे 2 ग्राम (आधा चम्मच) गर्म पानी के साथ दिन में 2 बार सेवन करना चाहिए। इससे श्वासनली की सूजन और दर्द में लाभ मिलता है। ब्रोंकाइटिस के अतिरक्त यह खांसी, जोड़ों में दर्द, कमर दर्द और हिपशूल में लाभकारी होता है। इसे आवश्यकतानुसार एक हफ्ते तक लेना चाहिए। पूर्ण रूप से लाभ न होने पर इसे 4-5 बार ले सकते हैं।
सोंठ और कायफल के मिश्रित योग से बनाए गये काढे़ का सेवन करने से वायु प्रणाली की सूजन में लाभ मिलता है।

- सोंठ, हरड़, बहेड़ा, आंवला और सरसों का काढ़ा बनाकर कुल्ला करें। इससे रोजाना सुबह-शाम कुल्ला करने से मसूढ़ों की सूजन, पीव, खून और दांतों का हिलना बंद हो जाता है। सौंठ को गर्म पानी में पीसकर लेप बना लें। इससे रोजाना दांतों को मलने से दांतों में दर्द नहीं होता और मसूढे़ मजबूत होते हैं। 

- सोंठ, मिर्च, पीपल, नागकेशर का चूर्ण घी के साथ माहवारी समाप्त होने के बाद स्त्री को सेवन कराने से गर्भ ठहर जाता है। 

- महारास्नादि में सोंठ का चूर्ण मिलाकर सुबह-शाम पीने और रोजाना रात को 2 चम्मच एरण्ड के तेल को दूध में मिलाकर सोने से पहले सेवन करने से अंगुलियों की कंपन की शिकायत दूर हो जाती है। 

- यदि दिल कमजोर हो, धड़कन तेज या बहुत कम हो जाती हो, दिल बैठने लगता हो तो 1 चम्मच सोंठ को एक कप पानी में उबालकर उसका काढ़ा बना लें। यह काढ़ा रोज इस्तेमाल करने से लाभ होता है। 

- 10 ग्राम सोंठ और 10 ग्राम अजवायन को 200 मिलीलीटर सरसों के तेल में डालकर आग पर गर्म करें। सोंठ और अजवायन भुनकर जब लाल हो जाए तो तेल को आग से उतार लें। यह तेल सुबह-शाम दोनों घुटनों पर मलने से रोगी के घुटनों का दर्द दूर हो जाता है। 10 ग्राम सोंठ, 10 ग्राम कालीमिर्च, 5 ग्राम बायविडंग और 5 ग्राम सेंधानमक को एक साथ पीसकर चूर्ण बना लें। इस चूर्ण को एक छोटी बोतल में भर लें, फिर इस चूर्ण में आधा चम्मच शहद मिलाकर चाटने से गठिया का दर्द दूर हो जाता है।

- 6 ग्राम पिसी हुई सोंठ में 1 ग्राम नमक मिलाकर गर्म पानी से फंकी लेने से पित्त की पथरी में फायदा होता है। 

- सोंठ, गुग्गुल तथा गुड़ को 10-10 ग्राम की मात्रा में लेकर काढ़ा बनाकर सोते समय पीने से मासिक-धर्म सम्बन्धी परेशानी दूर हो जाती हैं।
50 ग्राम सोंठ, 25 ग्राम गुड़ और 5 ग्राम बायविडंग को कुचलकर 2 कप पानी में उबालें। जब एक कप बचा रह जाए तो उसे पी लेना चाहिए। इससे मासिक-धर्म नियमित रूप से आने लगता है।

- गुड़ के साथ 10 ग्राम सोंठ खाने से पीलिया का रोग कुछ ही दिनों में ठीक हो जाता है। 

- बुढ़ापे में पाचन क्रिया कमजोर पड़ने लगती है. वात और कफ का प्रकोप बढ़ने लगता है. हाथो पैरो तथा शारीर के समस्त जोड़ो में दर्द रहने लगता है. सौंठ मिला हुआ दूध पीने से बुढ़ापे के रोगों से राहत मिलती है.