Showing posts with label centre. Show all posts
Showing posts with label centre. Show all posts

Monday, June 2, 2014

मधुमेह [डायबिटीज ]

मधुमेह [डायबिटीज ]------- 

- आजकल टीवी में तरह तरह के विज्ञापन आते रहते है की इन दवाइयों का उपयोग करने से आप मधुमेह से छुटकारा पा सकेंगे. इसमें कई आयुर्वेदिक है कई एलोपेथी के .
- मधुमेह से परेशान व्यक्ति सब तरह की दवाइयां आजमाता है पर मधुमेह से छुटकारा नहीं पा पाता क्योंकि यह एक बहुत बड़ा मिथक है की मधुमेह एक रोग है.
- मधुमेह एक स्थिति है जिसमे शरीर के एक महत्वपूर्ण अंग ने बगावत कर दी है . आसपास बहुत शकर है , ऊर्जा है पर शरीर उसे इस्तेमाल नहीं कर पाता.
- वह क्या कारण है जो हमारे शरीर का ही एक अंग हमारा साथ नहीं देता . वह है हमारी आत्मा जो हमारे विचार निरंतर झेलती है. कुछ नकारात्मक विचार जो हम लगातार करते रहते है हमारे किसी ना किसी नाज़ुक ग्रंथी को या तो सुस्त या अधिक कार्यरत कर देते है.
- जीवनी शक्ति उन अंगों तक पहुँच नहीं पाती. इस लिए ध्यान अत्यावश्यक है. मधुमेह के मरीज़ रोज़ भोजन से पहले शांत चित्त हो कर विचार करे की प्रभु की दिव्य शक्ति लीवर को प्राप्त हो रही है जिससे हमारे रक्त में जो शर्करा है वह कम हो रही है.
- ध्यान करते हुए हमें स्वयं को परेशान करने वाले विचारों को फेंक देना है. जो पुराने और भुला दिए गए नकारात्मक विचार है उन्हें भी हटाना है.
- ये नकारात्मक विचार किसी के लिए गुस्सा , नफरत , किसी का दिया आघात , कोई कमी का अनुभव आदि हो सकते है.
- कभी बिना भूख के खाना और कभी भूख लगने पर भी ना खाना दोनों ही गलत है.
- कई दिनों के उपवास जिसमे चाय कॉफ़ी पी जाए , साबूदाना , वनस्पति घी , रबड़ी , पेड़े , सफ़ेद शकर , तले हुए कंद आदि लिए जाए गलत है.
- उपवास जिसमे एसिडिटी हो गलत है.
- पॉलिश वाले चावल , सफ़ेद शकर, मैदा, आदि पदार्थों का अधिक सेवन कभी ना करे.
- भोजन प्रेशर कूक ना करे. हो सके तो मिटटी के बर्तन में उबला अन्न ले. एल्युमिनियम में तो बिलकुल ना पकाए.
- वात प्रवृत्ति पर नियंत्रण पाने के लिए अनुलोम विलोम और कपालभाती प्राणायाम अत्यावश्यक है. मंडूकासन करने से भी लाभ होता है |
- पेट और कमर के आसपास कभी चर्बी जमा ना होने दे. यह मधुमेह को जन्म देती है.
- सभी प्रकार के रस वाले और हर प्रकार से खाए जाने वाले अन्न ले.
- ज़मीन पर बैठ कर हाथों से भोजन ले. भोजन के पहले प्रार्थना अवश्य करे.
- गौसेवा करे और पंचगव्य का सेवन करे.

Sunday, May 25, 2014

हरड़ Helath benefits of Harad

हरड़ -
हरड़ के नाम से तो हम सब बचपन से ही परिचित हैं | इसके पेड़ पूरे भारत में पाये जाते हैं | इसका रंग काला व पीला होता है तथा इसका स्वाद खट्टा,मीठा और कसैला होता है | आयुर्वेदिक मतानुसार हरड़ में पाँचों रस -मधुर ,तीखा ,कड़ुवा,कसैला और अम्ल पाये जाते हैं | वैज्ञानिक मतानुसार हरड़ की रासायनिक संरचना का विश्लेषण करने पर ज्ञात होता है कि इसके फल में चेब्यूलिनिक एसिड ३०%,टैनिन एसिड ३०-४५%,गैलिक एसिड,ग्लाइकोसाइड्स,राल और रंजक पदार्थ पाये जाते हैं | ग्लाइकोसाइड्स कब्ज़ दूर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं| ये तत्व शरीर के सभी अंगों से अनावश्यक पदार्थों को निकालकर प्राकृतिक दशा में नियमित करते हैं | यह अति उपयोगी है | आज हम हरड़ के कुछ लाभ जानेंगे -
१- हरड़ के टुकड़ों को चबाकर खाने से भूख बढ़ती है |
२- छोटी हरड़ को पानी में घिसकर छालों पर प्रतिदिन ०३ बार लगाने से मुहं के छाले नष्ट हो जाते हैं | इसको आप रात को भोजन के बाद भी चूंस सकते हैं |
३- छोटी हरड़ को पानी में भिगो दें | रात को खाना खाने के बाद चबा चबा कर खाने से पेट साफ़ हो जाता है और गैस कम हो जाती है |
४- कच्चे हरड़ के फलों को पीसकर चटनी बना लें | एक -एक चम्मच की मात्रा में तीन बार इस चटनी के सेवन से पतले दस्त बंद हो जाते हैं |
५- हरड़ का चूर्ण एक चम्मच की मात्रा में दो किशमिश के साथ लेने से अम्लपित्त (एसिडिटी ) ठीक हो जाती है |
६- हरीतकी चूर्ण सुबह शाम काले नमक के साथ खाने से कफ ख़त्म हो जाता है |
७- हरड़ को पीसकर उसमे शहद मिलाकर चाटने से उल्टी आनी बंद हो जाती है|