Tuesday, February 18, 2014

घरेलू नुस्खों से दूर करें दर्द

घरेलू नुस्खों से दूर करें दर्द

जिस तरह का जीवन हम जी रहे हैं, उसमें सिरदर्द होना एक आम बात है। लेकिन यह दर्द हमारी दिनचर्या में शामिल हो जाए तो हमारे लिए बहुत कष्टदायी हो जाता है। दर्द से छुटकारा पाने के लिए हम पेन किलर घरेलू उपाय अपनाकर इसे दूर कर सकते हैं। इन घरेलू उपायों के कोई साईड इफेक्ट भी नहीं होते।

1. अदरक: अदरक एक दर्द निवारक दवा के रूप में भी काम करती है। यदि सिरदर्द हो रहा हो तो सूखी अदरक को पानी के साथ पीसकर उसका पेस्ट बना लें और इसे अपने माथे पर लगाएं। इसे लगाने पर हल्की जलन जरूर होगी लेकीन यह सिरदर्द दूर करने में मददगार होती है।

2. सोडा: पेट में दर्द होने पर कप पानी में एक चुटकी खाने वाला सोडा डालकर पीने से पेट दर्द में राहत मिलती है। सि्त्रयो के मासिक धर्म के समय पेट के नीचे होने वाले दर्द को दूर करने मे खाने वाला सोडा पानी में मिलाकर पीने से दर्द दूर होता है। एसिडिटी होने पर एक चुटकी सोडा, आधा चम्मच भुना और पिसा हुआ जीरा, 8 बूंदे नींबू का रस और स्वादानुसार नमक पानी में मिलाकर पीने से एसिडिटी में राहत मिलती है।

3. अजवायन: सिरदर्द होने पर एक चम्मच अजवायन को भूनकर साफ सूती कपडे में बांधकर नाक के पास लगाकर गहरी सांस लेने से सिरदर्द में राहत मिलती है। ये प्रक्रिया तब तक दोहराएं जब तक आपका सिरदर्द ठीक नहीं हो जाता। पेट दर्द को दूर करने में भी अजवायन सहायक होती है। पेट दर्द होने पर आधा चम्मच अजवायन को पानी के साथ फांखने से पेट दर्द में राहत मिलती है।

4. बर्फ : सिरदर्द में बर्फ की सिंकाई करना बहुत फायदेमंद होता है। इसके अलावा स्पॉन्डिलाइटिस में भी बर्फ की सिंकाई लाभदायक होती है। गर्दन में दर्द होने पर भी बर्फ की सिंकाई लाभदायक होती है।

5. हल्दी: हल्दी कीटाणुनाशक होती है। इसमें एंटीसेप्टिक, एंटीबायोटिक और दर्द निवारक तत्व पाए गए हैं। ये तत्व चोट के दर्द और सूजन को कम करने में सहायक होते हैं। घाव पर हल्दी का लेप लगाने से वह ठीक हो जाता है। चोट लगने पर दूध में हल्दी डालकर पीने से दर्द में राहत मिलती है। एक चम्मच हल्दी में आधा चम्मच काला गर्म पानी के साथ फांखने से पेट दर्द व गैस में राहत मिलती है।

6. तुलसी के पत्ते: तुलसी में बहुत सारे औषधीय तत्व पाए जाते हैं। तुलसी की पत्तियों को पीसकर चंदन पाउडर में मिलाकर पेस्ट बना लें। दर्द होने पर प्रभावित जगह पर उस लेप को लगाने से दर्द में राहत मिलेगी। एक चम्मच तुलसी के पत्तों का रस शहद में मिलाकर हल्का गुनगुना करके खाने से गले की खराश और दर्द दूर हो जाता है। खांसी में भी तुलसी का रस काफी फायदेमंद होता है।

7. मेथी: एक चम्मच मेथी दाना में चुटकी भर पिसी हुई हींग मिलाकर पानी के साथ फांखने से पेटदर्द में आराम मिलता है। मेथी डायबिटीज में भी लाभदायक होती है। मेथी के लड्डू खाने से जोडों के दर्द में लाभ मिलता है।

8. हींग: हींग दर्द निवारक और पित्तवर्द्धक होती है। छाती और पेटदर्द में हींग का सेवन लाभकारी होता है। छोटे बच्चों के पेट में दर्द होने पर हींग को पानी में घोलकर पकाने और उसे बच्चो की नाभि के चारो ओर उसका लेप करने से दर्द में राहत मिलती है।

9. सेब: सुबह खाली पेट प्रतिदिन एक सेब खाने से सिरदर्द की समस्या से छुटकारा मिलता है। चिकित्सकों का मानना है कि सेब का नियमित सेवन करने से रोग नहीं घेरते।

10. करेला: करेले का रस पीने से पित्त में लाभ होता है। जोडों के दर्द में करेले का रस लगाने से काफी राहत मिलती है

गरम पानी पीने के फायदे

गरम पानी पीने के फायदे-

सफाई और शुद्धी- यह शरीर को अंदर से साफ करता है। अगर आपका पाचन तंत्र सही नहीं रहता है, तो आपको दिन में दो बार गरम पानी पीना चाहिये। सुबह गरम पानी पीने से शरीर के सारे विशैले तत्‍व बाहर निकल जाते हैं, जिससे पूरा सिस्‍टम साफ हो जाता है। नींबू और शहद डालने से बड़ा फायदा होता है।

कब्‍ज दूर करे- शरीर में पानी की कमी हो जाने की वजह से कब्‍ज की समस्‍या पैदा हो जाती है। रोजाना एक ग्‍लास सुबह गरम पानी पीने से फूड पार्टिकल्‍स टूट जाएंगे और आसानी से मल बन निकल जाएंगे। मोटापा कम करे- सुबह के समय या फिर हर भोजन के बाद एक ग्‍लास गरम पानी में नींबू और शहद मिला कर पीने से चर्बी कम होती है। नींबू मे पेकटिन फाइबर होते हैं जो बार-बार भूख लगने से रोकते हैं।

मासिक धर्म की समस्या

मासिक धर्म की समस्या

10 से 15 साल की आयु की लड़की के अंडाशय हर महीने एक विकसित डिम्ब (अण्डा) उत्पन्न करना शुरू कर देते हैं। वह अण्डा अण्डवाहिका नली (फैलोपियन ट्यूव) के द्वारा नीचे जाता है जो कि अंडाशय को गर्भाशय से जोड़ती है। जब अण्डा गर्भाशय में पहुंचता है, उसका अस्तर रक्त और तरल पदार्थ से गाढ़ा हो जाता है। ऐसा इसलिए होता है कि यदि अण्डा उर्वरित हो जाए, तो वह बढ़ सके और शिशु के जन्म के लिए उसके स्तर में विकसित हो सके। यदि उस डिम्ब का पुरूष के शुक्राणु से सम्मिलन न हो तो वह स्राव बन जाता है जो कि योनि से निष्कासित हो जाता है। इसी स्राव को मासिक धर्म, रजोधर्म या माहवारी (Menstural Cycle or MC) कहते हैं।

ऑस्ट्रेलिया में हुए शोध के मुताबिक जिन लड़कियों के भाई उनसे उम्र में बड़े होते हैं, उनका मासिक धर्म देर से शुरू होता है। एक और शोध के मुताबिक टीवी देखना और कृत्रिम रोशनी में ज़्यादा वक्त गुजारने से भी मासिक धर्म जल्द शुरू होने की समस्या हो सकती है। एक अन्य थिअरी के मुताबिक मासिक धर्म जल्द होने की वजह मां से कमजोर भावनात्मक रिश्ता भी है। हालांकि, इंग्लैंड के डॉक्टर हाइंडमार्श का मानना है कि इन अवधारणाओं के पीछे ठोस मेडिकल तर्क नहीं है। कम उम्र मंक ही मासिक धर्म शुरू होने की वजह से लड़कियां अपनी हम उम्र लड़कियों की तुलना में काफी लंबी जाती हैं। लेकन जानकारों के मुताबिक जब वे बड़ी होती हैं तो उनका कद अपनी हम उम्र लड़कियों की तुलना में छोटा रहता है

लड़कियों में 12 साल से पहले मासिक धर्म शुरू होने की समस्या को ‘प्रेकोसस प्यूबर्टी’ कहते हैं। हैदराबाद में प्रैक्टिस कर रहे कई डॉक्टरों का मानना है कि पिछले कुछ सालों में प्रेकोसस प्यूबर्टी की समस्या बढ़ी है। इसके चलते इस बीमारी की रोकथाम के लिए लिए इलाज कराने वालों की तादाद भी बढ़ी है।मासिक धर्म की गड़बड़ी स्त्री के लिए किसी मानसिक परेशानी से कम नहीं। इसके अलग-अलग कारणों से अधिकतम स्त्रियां त्रस्त एवं परेशान रहती है।

माहवारी चक्र की सामान्य अवधि क्या है?
माहवारी चक्र महीने में एक बार होता है, सामान्यतः 28 से 32 दिनों में एक बार। हालांकि अधिकतर मासिक धर्म का समय तीन से पांच दिन रहता है परन्तु दो से सात दिन तक की अवधि को सामान्य माना जाता है।

माहवारी सम्बन्धी समस्याएं
ज्यादातर महिलाएं माहवारी (Menstrual cycle) की समस्याओं से परेशान रहती है लेकिन अज्ञानतावश या फिर शर्म या झिझक के कारण लगातार इस समस्या से जूझती रहती है. यहां समस्या बताने से पहले यह भी बता दें कि माहवारी है क्या. दरअसल दस से पन्द्रह साल की लड़की के अण्डाशय हर महीने एक परिपक्व अण्डा या अण्डाणु पैदा करने लगता है। वह अण्डा डिम्बवाही थैली (फेलोपियन ट्यूब) में संचरण करता है जो कि अण्डाशय को गर्भाशय से जोड़ती है। जब अण्डा गर्भाशय में पहुंचता है तो रक्त एवं तरल पदाथॅ से मिलकर उसका अस्तर गाढ़ा होने लगता है। यह तभी होता है जब कि अण्डा उपजाऊ हो, वह बढ़ता है, अस्तर के अन्दर विकसित होकर बच्चा बन जाता है। गाढ़ा अस्तर उतर जाता है और वह माहवारी का रूधिर स्राव बन जाता है, जो कि योनि द्वारा शरीर से बाहर निकल जाता है। जिस दौरान रूधिर स्राव होता रहता है उसे माहवारी अवधि/पीरियड कहते हैं। औरत के प्रजनन अंगों में होने वाले बदलावों के आवर्तन चक्र को माहवारी चक्र कहते हैं। यह हॉरमोन तन्त्र के नियन्त्रण में रहता है एवं प्रजनन के लिए जरूरी है। माहवारी चक्र की गिनती रूधिर स्राव के पहले दिन से की जाती है क्योंकि रजोधर्म प्रारम्भ का हॉरमोन चक्र से घनिष्ट तालमेल रहता है। माहवारी का रूधिर स्राव हर महीने में एक बार 28 से 32 दिनों के अन्तराल पर होता है। परन्तु महिलाओं को यह याद करना चाहिए कि माहवारी चक्र के किसी भी समय गर्भ होने की सम्भावना है।

माहवारी से पहले की स्थिति के क्या लक्षण हैं?
माहवारी होने से पहले (पीएमएस) के लक्षणों का नाता माहवारी चक्र से ही होता है। सामान्यतः ये लक्षण माहवारी शुरू होने के 5 से 11 दिन पहले शुरू हो जाते हैं। माहवारी शुरू हो जाने पर सामान्यतः लक्षण बन्द हो जाते हैं या फिर कुछ समय बाद बन्द हो जाते हैं। इन लक्षणों में सिर दर्द, पैरों में सूजन, पीठ दर्द, पेट में मरोड़, स्तनों का ढीलापन अथवा फूल जाने की अनुभूति होती है।

भारी माहवारी के स्राव के क्या कारण हैं?

भारी माहवारी स्राव के कारणों में शामिल है –
(1) गर्भाषय के अस्तर में कुछ निकल आना।
(2) जिसे अपक्रियात्मक गर्भाषय रक्त स्राव कहा जाता है। जिस की व्याख्या नहीं हो पाई है।
(3) थायराइड ग्रन्थि की समस्याएं
(4) रक्त के थक्के बनने का रोग
(5) अंतरा गर्भाषय उपकरण
(6) दबाव।

सामान्य पांच दिन की अपेक्षा अगर माहवारी रक्त स्राव दो या चार दिन के लिए चले तो चिन्ता का कोई कारण होता है? नहीं, चिन्ता की कोई जरूरत नहीं। समय के साथ पीरियड का स्वरूप बदलता है, एक चक्र से दूसरे चक्र में भी बदल जाता है।

Health Benefits of Fenukgreek (Methi) in Hindi

Health Benefits of Fenukgreek (Methi) in Hindi 

आयुर्वेद के अनुसार मेथी एक बहुगुणी औषधि के रूप में प्रयोग की जा सकती है.भारतीय रसोईघर की यह एक महत्वपूर्ण हरी सब्जी है.प्राचीनकाल से ही इसके स्वास्थ्यवर्धक गुणों के कारण इसे सब्जी और औषधि के रूप में प्रयोग किया जाता रहा है.
मेथी की सब्जी तीखी, कडवी और उष्ण प्रकृति की होती है.इसमें प्रोटीन केल्शियम,पोटेशियम, सोडियम,फास्फोरस,करबोहाई ड्रेट , आयरन और विटामिन सी प्रचुर मात्र में होते हैं. ये सब ही शरीर के लिए आवश्यक पौष्टिक तत्व हैं.यह कब्ज, गैस,बदहजमी, उलटी, गठिया, बवासीर, अपच, उच्चरक्तचाप , साईटिका जैसी बीमारियों को दूर करने में सहायक है.यह ह्रदय रोगियों के लिए भी लाभकारी है.मेथी के सूखे पत्ते, जिन्हें कसूरी मेथी भी कहते हैं का प्रयोग कई व्यंजनों को सुगन्धित बनाने में होता है.मेथी के बीज भी एक बहुमूल्य औषधि के सामान हैं.ये भूख को बढ़ाते हैं एवं संक्रामक रोगों से रक्षा करते हैं.इनको खाने से पसीना आता है, जिससे शरीर के विजातीय तत्व बाहर निकलते हैं. इससे सांस एवं शरीर की दुर्गन्ध से भी छुटकारा मिलता है.आधुनिक शोध के अनुसार यह अल्सर में भी लाभकारी है.
मेथी से बने लड्डू एक अच्छा टॉनिक है जो प्रसूति के बाद खिलाये जाते हैं.शरीर की सारी व्याधियों को दूर कर यह शरीर में बच्चे के लिए दूध की मात्र बढाती है.डायबिटीज में मेथी के दानों का पावडर बहुत लाभकारी होता है.इसमें अमीनो एसिड होते है जो कि इन्सुलिन निर्माण में सहायक होता है.ये थकान , कमरदर्द और बदनदर्द में लाभदायक है.इसकी पत्तियों का लेप बालों एवं चहरे के कई विकारों को दूर कर उसे कांतिमय बनाता है.

खाँसी की आयुर्वेदिक चिकित्सा

खाँसी की आयुर्वेदिक चिकित्सा
खाँसी कोई रोग नहीं होता। यह गले में हो रही खराश और उत्तेजना की सहज प्रतिक्रिया होती है। असल में खाँसी गले और सांस की नलियों को खुला रखने के लिए काफी महत्वपूर्ण होती है, पर हद से ज़्यादा होनेवाली खाँसी किसी नकिसी बीमारी या रोग से जुड़ी होती है। कुछ खाँसी सूखी होती हैं, और कुछ बलगम वाली।
खाँसी तीव्र या पुरानी होती है:
तीव्र खाँसी अचानक शुरू हो जाती हैं, और सर्दी-ज़ुकाम, फ्लू या सायनस के संक्रमण के कारण होती है। यह आम तौर से दो या तीन हफ़्तों में ठीक हो जाती है।
पुरानी या दीर्घकालीन खाँसी दो तीन हफ़्तों से ज़्यादा जारी रहती है।
खाँसी तीव्र या पुरानी होती है:
तीव्र खाँसी अचानक शुरू हो जाती हैं, और सर्दी-ज़ुकाम, फ्लू या सायनस के संक्रमण के कारण होती है। यह आम तौर से दो या तीन हफ़्तों में ठीक हो जाती है।
पुरानी या दीर्घकालीन खाँसी दो तीन हफ़्तों से ज़्यादा जारी रहती है।

खाँसी तीव्र या पुरानी होती है:
तीव्र खाँसी अचानक शुरू हो जाती हैं, और सर्दी-ज़ुकाम, फ्लू या सायनस के संक्रमण के कारण होती है। यह आम तौर से दो या तीन हफ़्तों में ठीक हो जाती है।
पुरानी या दीर्घकालीन खाँसी दो तीन हफ़्तों से ज़्यादा जारी रहती है।
खाँसी के घरेलू और आयुर्वेदिक उपचार
1 ग्राम हल्दी के पाउडर को एक चम्मच शहद में मिलाकर लेने से भी सूखी खाँसी में लाभ मिलता है।
आधा तोला अनार की सूखी छाल बारीक कूटकर, छानकर उसमे थोडा सा कपूर मिलायें। यह चूर्ण दिन में दो बार पानी के साथ मिलाकर पीने से भयंकर और कष्टदायक खाँसी मिटती है।
सौंफ और मिश्री का चूर्ण मुहं में रखने से रह रह कर होनेवाली गर्मी की खाँसी मिट जाती है।
सूखी खाँसी के उपचार के लिए एक छोटे से अदरक के टुकड़े को छील लें और उसपर थोड़ा सा नमक छिड़क कर उसे चूस लें।
2 ग्राम काली मिर्च और 1-1/2 ग्राम मिश्री का चूर्ण या शितोपलादी चूर्ण 1-1ग्राम दिन में 3 बार शहद के साथ चाटने से खाँसी में लाभ होता है।
नींबू के रस में 2 चम्मच ग्लिसरीन और 2 चम्मच शहद मिलाकर मिश्रण बना लें, और रोजाना इस मिश्रण का 1 चम्मच सेवन करने से खाँसी से काफी रहत मिलेगी।
मेहंदी के पत्तों के काढ़े से गरारे करना लाभदायक सिद्ध होता है।
अदरक की चाय का सेवन करने से भी खाँसी ठीक होने में लाभ मिलता है।
लंबे समय तक इलायची चबाने से भी खाँसी से राहत मिलती है।
लौंग के प्रयोग से भी खाँसी की उत्तेजना से काफी आराम मिलता है।
लौंग का तेल, अदरक और लहसून का मिश्रण बार बार होने वाली ऐसी खांसी से राहत दिलाता है जो कि तपेदिक, अस्थमा और ब्रौन्काइटिस के कारण उत्पन्न होती है। यह मिश्रण हर रात को सोने से पहले लें।
तुलसी के पत्तों का सार, अदरक और शहद मिलाकर एक मिश्रण बना लें, और ऐसी गंभीर खाँसी के उपचार के लिए लें जो कि तपेदिक और ब्रौन्काइटिस जैसी बीमारियों के कारण शुरू हुई है।
सीने में बलगम के जमाव को निष्काषित करने के लिए अंजीर बहुत ही उपयोगी होते हैं, और खाँसी को मिटाने में काफी सहायक सिद्ध होते हैं।
अदरक को पानी में 10-15 मिनट के लिए उबाल लें और उसमें एक दो चम्मच शुद्ध शहद मिलकर दिन में तीन चार बार पीये। ऐसा करने से आपका बलगम बाहर निकलता रहेगा और आपको खांसी में लाभ पहुंचेगा।
खान पान और आहार
ठंडे खान पान के सेवन से बचें क्योंकि इससे आपके गले की उत्तेजना और अधिक उग्र हो सकती है। और किसी भी तरल पदार्थ को पीने से पहले गर्म ज़रूर करें।
खान पान में पुराने चावल का प्रयोग करें।
ऐसे खान पान का सेवन बिलकुल ना करें जिससे शरीर को ठंडक पहुँचे। खीरे, हरे केले, तरबूज, पपीता और संतरों के सेवन को थोड़े दिनों के लिए त्याग दें।

खाँसी तीव्र या पुरानी होती है:तीव्र खाँसी अचानक शुरू हो जाती हैं, और सर्दी-ज़ुकाम, फ्लू या सायनस के संक्रमण के कारण होती है। यह आम तौर से दो या तीन हफ़्तों में ठीक हो जाती है।पुरानी या दीर्घकालीन खाँसी दो तीन हफ़्तों से ज़्यादा जारी रहती है।
खाँसी के घरेलू और आयुर्वेदिक उपचार375 मिलीग्राम फुलाया हुआ सुहागा शहद के साथ रात्री में लेने से या मुनक्के और मिश्री को मुहं में रखकर चूसने से खाँसी में लाभ मिलता है।1 ग्राम हल्दी के पाउडर को एक चम्मच शहद में मिलाकर लेने से भी सूखी खाँसी में लाभ मिलता है।आधा तोला अनार की सूखी छाल बारीक कूटकर, छानकर उसमे थोडा सा कपूर मिलायें। यह चूर्ण दिन में दो बार पानी के साथ मिलाकर पीने से भयंकर और कष्टदायक खाँसी मिटती है।सौंफ और मिश्री का चूर्ण मुहं में रखने से रह रह कर होनेवाली गर्मी की खाँसी मिट जाती है।सूखी खाँसी के उपचार के लिए एक छोटे से अदरक के टुकड़े को छील लें और उसपर थोड़ा सा नमक छिड़क कर उसे चूस लें।2 ग्राम काली मिर्च और 1-1/2 ग्राम मिश्री का चूर्ण या शितोपलादी चूर्ण 1-1ग्राम दिन में 3 बार शहद के साथ चाटने से खाँसी में लाभ होता है।नींबू के रस में 2 चम्मच ग्लिसरीन और 2 चम्मच शहद मिलाकर मिश्रण बना लें, और रोजाना इस मिश्रण का 1 चम्मच सेवन करने से खाँसी से काफी रहत मिलेगी।मेहंदी के पत्तों के काढ़े से गरारे करना लाभदायक सिद्ध होता है।अदरक की चाय का सेवन करने से भी खाँसी ठीक होने में लाभ मिलता है।लंबे समय तक इलायची चबाने से भी खाँसी से राहत मिलती है।लौंग के प्रयोग से भी खाँसी की उत्तेजना से काफी आराम मिलता है।लौंग का तेल, अदरक और लहसून का मिश्रण बार बार होने वाली ऐसी खांसी से राहत दिलाता है जो कि तपेदिक, अस्थमा और ब्रौन्काइटिस के कारण उत्पन्न होती है। यह मिश्रण हर रात को सोने से पहले लें।तुलसी के पत्तों का सार, अदरक और शहद मिलाकर एक मिश्रण बना लें, और ऐसी गंभीर खाँसी के उपचार के लिए लें जो कि तपेदिक और ब्रौन्काइटिस जैसी बीमारियों के कारण शुरू हुई है।सीने में बलगम के जमाव को निष्काषित करने के लिए अंजीर बहुत ही उपयोगी होते हैं, और खाँसी को मिटाने में काफी सहायक सिद्ध होते हैं। अदरक को पानी में 10-15 मिनट के लिए उबाल लें और उसमें एक दो चम्मच शुद्ध शहद मिलकर दिन में तीन चार बार पीये। ऐसा करने से आपका बलगम बाहर निकलता रहेगा और आपको खांसी में लाभ पहुंचेगा। 
खान पान और आहारठंडे खान पान के सेवन से बचें क्योंकि इससे आपके गले की उत्तेजना और अधिक उग्र हो सकती है। और किसी भी तरल पदार्थ को पीने से पहले गर्म ज़रूर करें।खान पान में पुराने चावल का प्रयोग करें।ऐसे खान पान का सेवन बिलकुल ना करें जिससे शरीर को ठंडक पहुँचे। खीरे, हरे केले, तरबूज, पपीता और संतरों के सेवन को थोड़े दिनों के लिए त्याग दें।
खान पान और आहार
ठंडे खान पान के सेवन से बचें क्योंकि इससे आपके गले की उत्तेजना और अधिक उग्र हो सकती है। और किसी भी तरल पदार्थ को पीने से पहले गर्म ज़रूर करें।
खान पान में पुराने चावल का प्रयोग करें।
ऐसे खान पान का सेवन बिलकुल ना करें जिससे शरीर को ठंडक पहुँचे। खीरे, हरे केले, तरबूज, पपीता और संतरों के सेवन को थोड़े दिनों के लिए त्याग दें।
खाँसी तीव्र या पुरानी होती है:तीव्र खाँसी अचानक शुरू हो जाती हैं, और सर्दी-ज़ुकाम, फ्लू या सायनस के संक्रमण के कारण होती है। यह आम तौर से दो या तीन हफ़्तों में ठीक हो जाती है।पुरानी या दीर्घकालीन खाँसी दो तीन हफ़्तों से ज़्यादा जारी रहती है।
खाँसी के घरेलू और आयुर्वेदिक उपचार375 मिलीग्राम फुलाया हुआ सुहागा शहद के साथ रात्री में लेने से या मुनक्के और मिश्री को मुहं में रखकर चूसने से खाँसी में लाभ मिलता है।1 ग्राम हल्दी के पाउडर को एक चम्मच शहद में मिलाकर लेने से भी सूखी खाँसी में लाभ मिलता है।आधा तोला अनार की सूखी छाल बारीक कूटकर, छानकर उसमे थोडा सा कपूर मिलायें। यह चूर्ण दिन में दो बार पानी के साथ मिलाकर पीने से भयंकर और कष्टदायक खाँसी मिटती है।सौंफ और मिश्री का चूर्ण मुहं में रखने से रह रह कर होनेवाली गर्मी की खाँसी मिट जाती है।सूखी खाँसी के उपचार के लिए एक छोटे से अदरक के टुकड़े को छील लें और उसपर थोड़ा सा नमक छिड़क कर उसे चूस लें।2 ग्राम काली मिर्च और 1-1/2 ग्राम मिश्री का चूर्ण या शितोपलादी चूर्ण 1-1ग्राम दिन में 3 बार शहद के साथ चाटने से खाँसी में लाभ होता है।नींबू के रस में 2 चम्मच ग्लिसरीन और 2 चम्मच शहद मिलाकर मिश्रण बना लें, और रोजाना इस मिश्रण का 1 चम्मच सेवन करने से खाँसी से काफी रहत मिलेगी।मेहंदी के पत्तों के काढ़े से गरारे करना लाभदायक सिद्ध होता है।अदरक की चाय का सेवन करने से भी खाँसी ठीक होने में लाभ मिलता है।लंबे समय तक इलायची चबाने से भी खाँसी से राहत मिलती है।लौंग के प्रयोग से भी खाँसी की उत्तेजना से काफी आराम मिलता है।लौंग का तेल, अदरक और लहसून का मिश्रण बार बार होने वाली ऐसी खांसी से राहत दिलाता है जो कि तपेदिक, अस्थमा और ब्रौन्काइटिस के कारण उत्पन्न होती है। यह मिश्रण हर रात को सोने से पहले लें।तुलसी के पत्तों का सार, अदरक और शहद मिलाकर एक मिश्रण बना लें, और ऐसी गंभीर खाँसी के उपचार के लिए लें जो कि तपेदिक और ब्रौन्काइटिस जैसी बीमारियों के कारण शुरू हुई है।सीने में बलगम के जमाव को निष्काषित करने के लिए अंजीर बहुत ही उपयोगी होते हैं, और खाँसी को मिटाने में काफी सहायक सिद्ध होते हैं। अदरक को पानी में 10-15 मिनट के लिए उबाल लें और उसमें एक दो चम्मच शुद्ध शहद मिलकर दिन में तीन चार बार पीये। ऐसा करने से आपका बलगम बाहर निकलता रहेगा और आपको खांसी में लाभ पहुंचेगा। 
खान पान और आहारठंडे खान पान के सेवन से बचें क्योंकि इससे आपके गले की उत्तेजना और अधिक उग्र हो सकती है। और किसी भी तरल पदार्थ को पीने से पहले गर्म ज़रूर करें।खान पान में पुराने चावल का प्रयोग करें।ऐसे खान पान का सेवन बिलकुल ना करें जिससे शरीर को ठंडक पहुँचे। खीरे, हरे केले, तरबूज, पपीता और संतरों के सेवन को थोड़े दिनों के लिए त्याग दें।

375 मिलीग्राम फुलाया हुआ सुहागा शहद के साथ रात्री में लेने से या मुनक्के और मिश्री को मुहं में रखकर चूसने से खाँसी में लाभ मिलता है।

भोजन के बाद वज्रासन से ठीक रखें पाचन

भोजन के बाद वज्रासन से ठीक रखें पाचन

बहुत हेवी डाइट के बाद तुरंत सोने या बैठकर टीवी देखने से हमें डाइजेशन संबंधी समस्याएं हो ही जाती हैं। ऐसे में अगर आप रोज खाने के बाद टीवी देखने या तुरंत सोने के बजाय वज्रासन को अपने रुटीन में शामिल करेंगे तो यकीनन आप डाइजेशन से संबंधित समस्याओं से दूर रहेंगे।

वज्रासन
वज्रासन को आप दिन में कभी भी कर सकते हैं लेकिन यह अकेला ऐसा आसन है जो खाने के तुरंत बाद यह आसन बहुत अधिक प्रभावी होता है। यह न सिर्फ पाचन की प्रक्रिया ठीक रखता है बल्कि लोवर बैकपेन से भी आराम दिलाता है।

ऐसे करें वज्रासन
- इस आसन को करने के लिए घुटनों को मोड़कर पंजों के बल सीधा बैठें।
- दोनों पैरों के अंगूठे आपस में मिलने चाहिए और एड़ियों में थोड़ी दूरी होनी चाहिए।
- शरीर का सारा भार पैरों पर रखें और दोनों हाथों को जांघों पर रखें।
- आपकी कमर से ऊपर का हिस्सा बिल्कुल सीधा होना चाहिए। थोड़ी देर इस अवस्था में बैठकर लंबी सांस लें।

रखें ध्यान
जिन लोगों को जोड़ों में दर्द हो या गठिया की दिक्कत हो वे इस आसन को न करें।

प्राणायाम करने के स्‍वास्‍थ्‍य लाभ

प्राणायाम करने के स्‍वास्‍थ्‍य लाभ

प्राणायाम, प्राण और आयाम से मिलकर बना होता है। इसका शाब्दिक अर्थ होता है - शरीर में ऊर्जा लाने वाली शक्ति देना। प्राणायाम एक विधि है, यह एक साधना है जिसमें सांस को एक विशेष प्रकार से अंदर खींचा जाता है और बाहर छोड़ा जाता है। इसके करने से कई शारीरिक स्‍वास्‍थ्‍य लाभ होते है।

प्राणायाम करने के दौरान कई बातों का ध्‍यान भी रखना चाहिए। सूर्योदय के समय इसे करने से सबसे ज्‍यादा लाभ मिलता है और इसे सही प्रकार से करना चाहिए। आप चाहें तो प्राणायाम सीखने के लिए किसी योगा सेंटर या प्रोफेशनल ट्रेनर की मदद ले सकते हैं। प्राणायाम के स्‍वास्‍थ्‍य लाभ निम्‍म प्रकार हैं :

फेफड़े को लाभ प्राणायाम करने के कई स्‍वास्‍थ्‍य लाभ होते है। इसका सबसे बड़ा स्‍वास्‍थ्‍य लाभ यह होता है कि इसे करने से फेफडों को आराम मिलता है। यह उन लोगों के लिए सबसे लाभदायक होता है जिन्‍हे अस्‍थमा या सांस सम्‍बंधी समस्‍या होती है।

वजन कम होता है प्राणायाम करने से बाहर निकला हुआ पेट अंदर हो जाता है और वजन घटाने में आराम मिलता है। अगर आप इसे नियमित रूप से करें तो आपको अपने वजन में फर्क अवश्‍य महसूस होगा।

डिटॉक्‍सीफिकेशन प्राणायाम एक ऐसा तरीका होता है जिसके माध्‍यम से हम शरीर से कई विषैले तत्‍वों को बाहर निकाल सकते है। इसे नियमित रूप से करने से शरीर में डिटॉक्‍सीफिकेशन की प्रक्रिया होती है। यह सभी उम्र के लोगों के लिए लाभकारी होता है।

ट्रीट डिप्रेशन प्राणायाम करने से मानसिक रूप से दृढता आती है और व्‍यक्ति को डिप्रेशन की अवस्‍था से बाहर निकलने में आराम मिलता है। नियमित रूप से प्राणायाम करने से डिप्रेशन और तनाव में आराम मिलता है। आप पढ़ाई करने के बाद हुई थकान को भी प्राणायाम से दूर भगा सकते है।

नाक साफ रहती है
जि‍न लोगों को हर समय सर्दी और जुकाम की समस्‍या रहती है और उनकी नाक बहती रहती है, ऐसे ग्रसित लोगों को प्राणायाम अवश्‍य करना चाहिए, इससे उनकी नाक के रास्‍ते साफ रहते है और जुकाम आदि में भी आराम मिलता है।

इम्‍यून सिस्‍टम में मजबूती
क्‍या अपने अपने शरीर के इम्‍यून सिस्‍टम को स्‍ट्रांग करने के कई उपाय कर चुके हैं। इसलिए, बेहतर होगा कि प्राणायाम करें। इससे शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली में सुधार आएगा।

पाचन क्रिया में आसानी
हमारे शरीर में पाचन सम्‍बंधी कई प्रकार की समस्‍याएं होती है, प्राणायाम करने से इन सभी समस्‍याओं में लाभ मिलता है। इसके लिए, प्राणायाम और विभिन्‍न प्रकार के योगा किए जा सकते है। पेट में गड़बड़ी होने पर भी प्राणायाम से लाभ मिलता है।

ह्दय स्‍वास्‍थ्‍य में सुधार प्राणायाम जैसे - अनुलोम विलोम और भास्त्रिका आदि करने से ह्दय सम्‍बंधी समस्‍याओं में लाभ मिलता है और दिल अच्‍छी तरह कार्य करता है। इससे शरीर में ब्‍लड़ सर्कुलेशन भी अच्‍छी तरह होता है और शरीर में ब्‍लड़ के माध्‍यम से ऑक्‍सीजन भरपूर मात्रा में पहुंचेगी।

मानसिक एकाग्रता सुधारने के लिए, प्राणायाम सबसे अच्‍छा तरीका है। इसे करने से दिमाग तेज होता है, दिमागी एकाग्रता बढ़ाने के लिए प्राणायाम करना बेहतर होता है।

साइनिसस से लड़ने की शक्ति अगर किसी भी व्‍यक्ति को साइनिसस की समस्‍या है तो उसे नियमित रूप से प्राणायाम करना चाहिए। इस बीमारी के इलाज के लिए भास्‍त्रिका नामक प्राणायाम योग सबसे अच्‍छा होता है। इसे घर पर आसानी से किया जा सकता है, लेकिन लाभ के लिए नियमित करना आवश्‍यक है।